राग- साहित्य
"दस्तावेज़" की पाँचवीं कड़ी लेकर आई है समकालीन हिंदी साहित्य की एक ऐसी प्रभावशाली आवाज़ से मुलाक़ात, जिन्होंने ग्रामीण यथार्थ, जातीय संघर्ष, स्त्री चेतना, और सामाजिक बदलाव को अपनी कहानियों का मूल स्वर...
‘दस्तावेज़’ एक साक्षात्कार श्रृंखला की इस यात्रा की अगली कड़ी हमें ले जाती है उस स्त्री स्वर तक, जिसने नारी अस्मिता, ग्रामीण जीवन और सामाजिक विद्रोह को अपने शब्दों में अनसुनी तीव्रता के साथ रूपायित...
'दस्तावेज़' की यह तीसरी कड़ी एक ऐसी कवयित्री की ओर हमें ले जाती है, जिनकी लेखनी में अनुभव, विमर्श और संवेदना का अनूठा संगम है-अनामिका।
बिहार के मुज़फ़्फ़रपुर में जन्मी और दिल्ली में शिक्षित अनामिका न...
अरुंधति रॉय केवल एक लेखिका नहीं, एक विचार हैं-जिससे कई लोग बहस करते हैं, और कई सिर्फ़ गाली देते हैं। आख़िर क्यों एक साहसी लेखिका, जिसने कश्मीर से लेकर नर्मदा घाटी तक आवाज़ उठाई, इतने तीखे घृणा की...
कुछ किताबें ऐसी होती हैं, जो पाठक के दिल में एक खाली जगह छोड़ देती हैं, जिसे पाठक अपने अनुभवों और यादों से भरता है। ऐसी कुछ किताबों की समीक्षा नहीं लिखी जा सकती, बस तारीफ़ की जा सकती है। इस कथन को...
10 फरवरी 2019 को दस्तावेज़ की यह यात्रा पहुँची एक ऐसे कवि के पास, जिनकी कविता हिंदी साहित्य के सामाजिक, राजनीतिक और मानवीय सरोकारों की एक सशक्त गूंज बन चुकी है-राजेश जोशी। यह दूसरा एपिसोड एक संवाद...
दस्तावेज एपिसोड 01: ममता कालिया से संवाद
9 सितम्बर 2018 को ‘दस्तावेज़’ की यह मौन यात्रा अपने पहले पड़ाव से आरंभ हुई-ममता कालिया के साथ एक गहरी, आत्मीय और संवेदनशील बातचीत के रूप में।
‘दस्तावेज़’ केवल...
"दस्तावेज़" केवल एक साहित्यिक साक्षात्कार श्रृंखला नहीं, बल्कि एक ध्यानपूर्ण यात्रा है , उन मौन क्षणों की ओर जहाँ कवि और कलाकार जन्म लेते हैं। राजेश जोशी, अनामिका और नरेश सक्सेना जैसी आवाज़ों के साथ...
कविता विडियो
रुप - पेंटिग
ग्रीक मिथक में डेडालस (Daedalus) को पहला महान शिल्पकार और वास्तुकार माना जाता है डेडालस ने क्रीट शहर में राजा मिनोस के लिए एक भूलभलैया बनाया, एक ऐसा भवन जो केवल दीवारों का नहीं, बल्कि भ्रम और अनुभव का...
In the quiet halls of Lalit Kala Akademi, amid the rhythmic hum of Delhi’s polluted autumn air, Pratibha Awasthi’s canvases stand like breathing forests. Her solo exhibition, Beyond the word, running...
“…समय बीत जाता है, पर निशान शेष रहता है। शरीर मिट जाता है, पर आभास बना रहता है।” देवराज डकोजी की कला इस क्षणभंगुरता और स्थायित्व के बीच के तनाव को प्रकट करती है। समय के एक दरार में...
“जब तुम वह छोड़ देते हो जो तुम हो, तो तुम वह बन जाते हो जो तुम हो सकते हो।दरवेश नाचता है, और दुनिया संगीत बन जाती है।” (रूमी ) सूफी दर्शन में कला के विभिन्न रूपों का आपसी मिलन होता है...
ग्रीक कथा में प्रसिद्ध “प्लेटो की गुफा” एक महत्वपूर्ण उदाहरण है। प्लेटो ने एक रूपक के रूप में बताया कि गुफा में बैठे कुछ लोग केवल छायाएँ देखते हैं और उन्हें ही वास्तविकता मानते हैं। जब...
कला में अमूर्तता “इंद्रधनुष साँप” (Rainbow Serpent) की तरह होता है। ऑस्ट्रेलियाई आदिवासी (Aboriginal) मिथकों में इस “इंद्रधनुष साँप” (Rainbow Serpent) की कथा है। आदिवासी लोगों का मानना है...
पेंटिंग की शक्ति के बारे में एक ग्रीक कथा है, जो प्लिनी के “Natural History” में वर्णित है। यह कहानी पांचवीं शताब्दी ईसा पूर्व के दो महान ग्रीक चित्रकारों ज़ियक्सिस (Zixis)और पार्हासियस...
“एक चित्र किसी अनुभव के बारे में नहीं बताता है, वह खुद एक अनुभव होता है” (संदर्भ -1) रोथको के इस कथन की तरह Ar Akhilesh 2019 का यह रेखाचित्र अर्थ से अधिक एक अनुभव की और ले जाता है। पहली...
“To take a photograph is to align the head, the eye, and the heart. It’s a way of life.” This line was written in The Mind’s Eye (1999) by Henri Cartier-Bresson, a pioneer in...
मंच- रंगमंच
Notion(s) : in between you and me by Savita Rani this play begins with the sensation of touching Imaginary water illuminated by a beam of circular light – an ethereal experience that sets the...
साजिदा साजी का ‘दोज़ख़’ एक ‘अति प्रस्तुति‘ थी और इस ‘अतिरेक’ का स्रोत इसके आधार उपन्यास ब्लैसफेमी (1998) से आया है एवं ब्लैसफेमी में यह अतिरेक लेखिका तहमीना दुर्रानी के अपने जीवन में मौजूद सामाजिक...
कभी-कभी किसी कला के प्रति कलाकार का समर्पण और अभ्यास की प्रक्रिया का प्रभाव इतना बड़ा हो जाता है कि उसकी कला प्रस्तुति पर बात करना गैर जरूरी लगता है। Luckyjee Gupta उसी तरह के कलाकार हैं, जिन्होनें...
गांधी कथा : कथा और डिज़ाइन का चुनाव और रंग निर्देशक लिओनार्दो द विंची के ‘द लास्ट सपर’ के स्थिर चित्र की तरह आरंभ होता है , लेखक-निर्देशक सौरभ अनंत और ‘विहान’ समूह के नाटक ‘गांधी कथा’ का, जिसमें...
“O Captain! my Captain! our fearful trip is done”कल जब मैं उत्तरा बावकर की शोकसभा में था , तब वाल्ट व्हिटमैन की कविता ” O Captain! my Captain” की यह पंक्ति बार-बार मन में आ रही...
फिल्मची
स्वाहा – In the Name of Fire" अभिलाष शर्मा की स्वतंत्र मगही फिल्म है जो दलित विमर्श, लिंचिंग, अंधविश्वास और ग्रामीण सामाजिक बहिष्कार को संवेदनशीलता से चित्रित करती है।निर्देशक अभिलाष शर्मा की स्वतंत्र...
‘अनोरा’ पाँच ऑस्कर और कान्स पुरस्कार लेकर पूरी दुनिया जीत चुकी है, मगर अनोरा’ देखने के बाद मेरे मन में खालीपन और असंतोष उत्पन्न हुआ, ऐसा असंतोष – जो तब उपजता है , जब कोई फिल्म...
बासु चटर्जी को साधारण मध्यमवर्गीय जीवन का सहज फिल्म निर्देशक माना जाता है और उनकी पहली फिल्म “सारा आकाश” (1969) को इसका उदाहरण माना जाता है, मगर बासु चटर्जी के निर्देशन और फिल्मों का एक...
In the world of spices, we have MDH masala, and in the realm of cinema, we have Bollywood masala films. Now, let’s talk about our beloved filmmaker, Ali Abbas Zafar, who has gifted us with...
