Banner of Dastavez – Episode 2 featuring poet Rajesh Joshi, a literary interview series highlighting voices of Indian literature

साहित्य

अर्थशिला पटना का वास्तुशिल्प: कच्चेपन का सौंदर्यशास्त्र

ग्रीक मिथक में डेडालस (Daedalus) को पहला महान शिल्पकार और वास्तुकार माना जाता है डेडालस ने क्रीट शहर में राजा मिनोस के लिए एक भूलभलैया बनाया, एक ऐसा भवन जो केवल दीवारों का नहीं, बल्कि भ्रम और अनुभव का...

𝐖𝐡𝐢𝐬𝐩𝐞𝐫𝐬 𝐨𝐟 𝐆𝐫𝐞𝐞𝐧 𝐏𝐫𝐚𝐭𝐢𝐛𝐡𝐚 𝐀𝐰𝐚𝐬𝐭𝐡𝐢’𝐬 𝐒𝐨𝐥𝐨

In the quiet halls of Lalit Kala Akademi, amid the rhythmic hum of Delhi’s polluted autumn air, Pratibha Awasthi’s canvases stand like breathing forests. Her solo exhibition, Beyond the word, running...

शिवमूर्ति : दस्तावेज एपिसोड 05 

"दस्तावेज़" की पाँचवीं कड़ी लेकर आई है समकालीन हिंदी साहित्य की एक ऐसी प्रभावशाली आवाज़ से मुलाक़ात, जिन्होंने ग्रामीण यथार्थ, जातीय संघर्ष, स्त्री चेतना, और सामाजिक बदलाव को अपनी कहानियों का मूल स्वर...

हमारे समय का सबसे रंगहीन दृश्य -स्वाहा In the Name of Fire

स्वाहा – In the Name of Fire" अभिलाष शर्मा की स्वतंत्र मगही फिल्म है जो दलित विमर्श, लिंचिंग, अंधविश्वास और ग्रामीण सामाजिक बहिष्कार को संवेदनशीलता से चित्रित करती है।निर्देशक अभिलाष शर्मा की स्वतंत्र...

मैत्रेयी पुष्पा : दस्तावेज एपिसोड 04 

‘दस्तावेज़’ एक साक्षात्कार श्रृंखला की इस यात्रा की अगली कड़ी हमें ले जाती है उस स्त्री स्वर तक, जिसने नारी अस्मिता, ग्रामीण जीवन और सामाजिक विद्रोह को अपने शब्दों में अनसुनी तीव्रता के साथ रूपायित...

अनामिका : दस्तावेज एपिसोड 03 

'दस्तावेज़' की यह तीसरी कड़ी एक ऐसी कवयित्री की ओर हमें ले जाती है, जिनकी लेखनी में अनुभव, विमर्श और संवेदना का अनूठा संगम है-अनामिका। बिहार के मुज़फ़्फ़रपुर में जन्मी और दिल्ली में शिक्षित अनामिका न...

अरुंधति रॉय से इतनी नफ़रत क्यों?

अरुंधति रॉय केवल एक लेखिका नहीं, एक विचार हैं-जिससे कई लोग बहस करते हैं, और कई सिर्फ़ गाली देते हैं। आख़िर क्यों एक साहसी लेखिका, जिसने कश्मीर से लेकर नर्मदा घाटी तक आवाज़ उठाई, इतने तीखे घृणा की...

Elementor #398

‘अनोरा’ पाँच ऑस्कर और कान्स पुरस्कार लेकर पूरी दुनिया जीत चुकी है, मगर अनोरा’ देखने के बाद मेरे मन में खालीपन और असंतोष उत्पन्न हुआ, ऐसा असंतोष – जो तब उपजता है , जब कोई फिल्म...

देवराज डकोजी:कला का आदिम अनुष्ठान

“…समय बीत जाता है, पर निशान शेष रहता है। शरीर मिट जाता है, पर आभास बना रहता है।” देवराज डकोजी की कला इस क्षणभंगुरता और स्थायित्व के बीच के तनाव को प्रकट करती है। समय के एक दरार में...

कविता-विडियो

अनामिका

21वीं सदी के कवि