Devaraj Dakoji
| |

देवराज डकोजी:कला का आदिम अनुष्ठान

“…समय बीत जाता है, पर निशान शेष रहता है। शरीर मिट जाता है, पर आभास बना रहता है।” देवराज डकोजी की कला इस क्षणभंगुरता और स्थायित्व के बीच के तनाव को प्रकट करती है। समय के एक दरार में एक डकोजी चित्र नहीं बनाते, बल्कि उत्खनन करते हैं। उनकी कला केवल चित्रण नहीं, बल्कि एक खुदाई…

vinay Kumar
|

विनय कुमार की मानसून सीरीज़ : अमूर्तता

वसिली कैंडिंस्की एक दिन अपने स्टूडियो में एक पेंटिंग देखी जिसे वह पहचान नहीं पाए, और उन्हें वह बहुत सुंदर लगा। बाद में उन्हें एहसास हुआ कि जिस पेंटिंग को वे पहचान नहीं पा रहे थे, वह पेंटिंग वास्तव में उनका ही बनाया हुआ था, लेकिन वह उल्टा रखा हुआ था। ( संदर्भ -1) एक उल्टी…

Akhilesh
| |

अखिलेश का रेखाचित्र : अर्थ की संभावना

“एक चित्र किसी अनुभव के बारे में नहीं बताता है, वह खुद एक अनुभव होता है” (संदर्भ -1) रोथको के इस कथन की तरह Ar Akhilesh 2019 का यह रेखाचित्र अर्थ से अधिक एक अनुभव की और ले जाता है। पहली नज़र में यह रेखाचित्र (चित्र में) साधारण प्रतीत हो सकता है, मगर इसकी खंडित शैली,…