Devaraj Dakoji
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देवराज डकोजी:कला का आदिम अनुष्ठान

“…समय बीत जाता है, पर निशान शेष रहता है। शरीर मिट जाता है, पर आभास बना रहता है।” देवराज डकोजी की कला इस क्षणभंगुरता और स्थायित्व के बीच के तनाव को प्रकट करती है। समय के एक दरार में एक डकोजी चित्र नहीं बनाते, बल्कि उत्खनन करते हैं। उनकी कला केवल चित्रण नहीं, बल्कि एक खुदाई…

वाज़दा ख़ान
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वाज़दा ख़ान की ‘ड्रीम डायरी’

ग्रीक कथा में प्रसिद्ध “प्लेटो की गुफा” एक महत्वपूर्ण उदाहरण है। प्लेटो ने एक रूपक के रूप में बताया कि गुफा में बैठे कुछ लोग केवल छायाएँ देखते हैं और उन्हें ही वास्तविकता मानते हैं। जब उनमें से एक व्यक्ति गुफा से बाहर निकलता है और वास्तविक संसार देखता है, तो वह समझता है कि…

प्रयाग शुक्ल
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प्रयाग शुक्ल : अमूर्त कला का संतुलन

कला में अमूर्तता “इंद्रधनुष साँप” (Rainbow Serpent) की तरह होता है। ऑस्ट्रेलियाई आदिवासी (Aboriginal) मिथकों में इस “इंद्रधनुष साँप” (Rainbow Serpent) की कथा है। आदिवासी लोगों का मानना है कि इंद्रधनुष साँप ही धरती के पहाड़, नदियाँ, झीलें और घाटियाँ बनाने के लिए जिम्मेदार था। जब साँप धरती पर सरकता था, तो वह अपने शरीर…