Devaraj Dakoji
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देवराज डकोजी:कला का आदिम अनुष्ठान

“…समय बीत जाता है, पर निशान शेष रहता है। शरीर मिट जाता है, पर आभास बना रहता है।” देवराज डकोजी की कला इस क्षणभंगुरता और स्थायित्व के बीच के तनाव को प्रकट करती है। समय के एक दरार में एक डकोजी चित्र नहीं बनाते, बल्कि उत्खनन करते हैं। उनकी कला केवल चित्रण नहीं, बल्कि एक खुदाई…

Nand Katyal
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नंद कत्याल : एक दृश्य-संगीतकार

“जब तुम वह छोड़ देते हो जो तुम हो, तो तुम वह बन जाते हो जो तुम हो सकते हो।दरवेश नाचता है, और दुनिया संगीत बन जाती है।” (रूमी ) सूफी दर्शन में कला के विभिन्न रूपों का आपसी मिलन होता है, जहाँ एक कला रूप अन्य से जुड़ी भावनाओं को उत्पन्न कर सकता है। एक…

वाज़दा ख़ान
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वाज़दा ख़ान की ‘ड्रीम डायरी’

ग्रीक कथा में प्रसिद्ध “प्लेटो की गुफा” एक महत्वपूर्ण उदाहरण है। प्लेटो ने एक रूपक के रूप में बताया कि गुफा में बैठे कुछ लोग केवल छायाएँ देखते हैं और उन्हें ही वास्तविकता मानते हैं। जब उनमें से एक व्यक्ति गुफा से बाहर निकलता है और वास्तविक संसार देखता है, तो वह समझता है कि…