Devaraj Dakoji
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देवराज डकोजी:कला का आदिम अनुष्ठान

“…समय बीत जाता है, पर निशान शेष रहता है। शरीर मिट जाता है, पर आभास बना रहता है।” देवराज डकोजी की कला इस क्षणभंगुरता और स्थायित्व के बीच के तनाव को प्रकट करती है। समय के एक दरार में एक डकोजी चित्र नहीं बनाते, बल्कि उत्खनन करते हैं। उनकी कला केवल चित्रण नहीं, बल्कि एक खुदाई…

प्रयाग शुक्ल
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प्रयाग शुक्ल : अमूर्त कला का संतुलन

कला में अमूर्तता “इंद्रधनुष साँप” (Rainbow Serpent) की तरह होता है। ऑस्ट्रेलियाई आदिवासी (Aboriginal) मिथकों में इस “इंद्रधनुष साँप” (Rainbow Serpent) की कथा है। आदिवासी लोगों का मानना है कि इंद्रधनुष साँप ही धरती के पहाड़, नदियाँ, झीलें और घाटियाँ बनाने के लिए जिम्मेदार था। जब साँप धरती पर सरकता था, तो वह अपने शरीर…

Akhilesh
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अखिलेश का रेखाचित्र : अर्थ की संभावना

“एक चित्र किसी अनुभव के बारे में नहीं बताता है, वह खुद एक अनुभव होता है” (संदर्भ -1) रोथको के इस कथन की तरह Ar Akhilesh 2019 का यह रेखाचित्र अर्थ से अधिक एक अनुभव की और ले जाता है। पहली नज़र में यह रेखाचित्र (चित्र में) साधारण प्रतीत हो सकता है, मगर इसकी खंडित शैली,…