साजिदा साजी
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साजिदा साजी का ‘दोज़ख़’ – अतिरेक हिंसा, यथार्थ और सार्थकता

साजिदा साजी का ‘दोज़ख़’ एक ‘अति प्रस्तुति‘ थी और इस ‘अतिरेक’ का स्रोत इसके आधार उपन्यास ब्लैसफेमी (1998) से आया है एवं ब्लैसफेमी में यह अतिरेक लेखिका तहमीना दुर्रानी के अपने जीवन में मौजूद सामाजिक हिंसा से आया है। हॉलीवुड में फिल्मों का एक जोनर ‘बॉडी टार्चर या सलेशर’ फिल्म की है, जिसमें शारीरिक और…

लक्की जी गुप्ता का माँ मुझे टैगोर बना दे
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लक्की जी गुप्ता का माँ मुझे टैगोर बना दे

 कभी-कभी किसी कला के प्रति कलाकार का समर्पण और अभ्यास की प्रक्रिया का प्रभाव इतना बड़ा हो जाता है कि उसकी कला प्रस्तुति पर बात करना गैर जरूरी लगता है। Luckyjee Gupta उसी तरह के कलाकार हैं, जिन्होनें निरंतर यात्रा करते हुए अपने रंगकर्म की प्रक्रिया के कद को धीरे-धीरे इतना बड़ा कर लिया है…

गांधी कथा नाटक चित्र 5
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पार्टनर कहो तुम्हारी कथा क्या है ? गांधी कथा की रंगमंच समीक्षा

  गांधी कथा : कथा और डिज़ाइन का चुनाव और रंग निर्देशक लिओनार्दो द विंची के ‘द लास्ट सपर’ के स्थिर चित्र की तरह आरंभ होता है , लेखक-निर्देशक सौरभ अनंत और ‘विहान’ समूह के नाटक ‘गांधी कथा’ का, जिसमें ‘कोरस अभिनेता’ गांधी की कथा को कहने को तत्पर हैं। पर शुरूआत कथा से नहीं, एक…