वाज़दा ख़ान की ‘ड्रीम डायरी’
ग्रीक कथा में प्रसिद्ध “प्लेटो की गुफा” एक महत्वपूर्ण उदाहरण है। प्लेटो ने एक रूपक के रूप में बताया कि गुफा में बैठे कुछ लोग केवल छायाएँ देखते हैं और उन्हें ही वास्तविकता मानते हैं। जब उनमें से एक व्यक्ति गुफा से बाहर निकलता है और वास्तविक संसार देखता है, तो वह समझता है कि जो वह अब तक देखता था, वह मात्र प्रतिबिंब था। यह कथा बताती है कि यथार्थ को देखने के लिए सीमित दृष्टिकोण से परे जाकर अधिक गहरे और अमूर्त अर्थों को समझना ज़रूरी है। कवियत्री Vazda Khan की कलाकृति ‘ड्रीम डायरी’ (2024, ऑयल ऑन कैनवास, 42×28 इंच) भी इसी तरह के अमूर्तता के द्वारा हमें ‘स्वयं से बाहर’ ले जाता है।
वाज़दा ख़ान की ‘ड्रीम डायरी’ में गहरे काले रंग की पृष्ठभूमि प्रमुख है, जिसमें सफेद और लाल बिंदु बिखरे हुए हैं। यह ब्रह्मांडीय आकाश की छवि प्रस्तुत करता है। काला रंग यहां अज्ञात, रहस्यमय और अनंत संभावनाओं का प्रतीक है। लाल रंग का उपयोग ऊर्जा, जीवन और संघर्ष का प्रतिनिधित्व करता है, जबकि सफेद रंग स्वप्न और शांति का प्रतीक है।ख़ान ने रंगों की परतों के माध्यम से गहराई का निर्माण किया है। रंगों की यह बनावट एक आंतरिक यात्रा का आभास कराती है, जैसे हम अपनी स्मृतियों और स्वप्नों की परतें खोल रहे हों।
पेंटिंग की संरचना नियंत्रित और स्वप्निल है। पेंटिंग के केंद्र में एक लाल सीढ़ी जैसी संरचना है, जो ऊपर की ओर उठती हुई प्रतीत होती है। इसके चारों ओर बिखरे हुए ज्यामितीय आकृतियाँ और बिंदु संतुलन और अराजकता के बीच एक संवाद का निर्माण करते हैं। वैसे निचले हिस्से में बनी संरचनाएँ ऊपरी हिस्से की तुलना में अधिक जटिल और घनी प्रतीत होती हैं। यह संतुलन को चुनौती देता है और रचना के समग्र प्रवाह को बाधित कर सकता है।
पेंटिंग में प्रतीकों का उपयोग बेहद प्रभावी और बहुस्तरीय है लाल सीढ़ी आत्मा की यात्रा का प्रतीक है। यह स्वप्न और वास्तविकता के बीच का पुल है, जो जीवन से परे की खोज और आत्म-ज्ञान की ओर संकेत करता है चंद्राकार और अन्य ज्यामितीय आकृतियाँ द्वैत का प्रतिनिधित्व करती हैं—प्रकाश और अंधकार, ज्ञात और अअज्ञात सफेद और लाल बिंदु मानो स्मृतियों और स्वप्नों के टूटे हुए टुकड़े हैं। ये बिंदु मानव मस्तिष्क की अनंत संभावनाओं और जटिलता को दर्शाते हैं। पेंटिंग के निचले हिस्से में मशीन जैसी संरचनाएँ हैं, जो आधुनिकता, प्रौद्योगिकी और मानवीय संघर्ष का प्रतीक हैं। यह संकेत देती हैं कि कैसे मनुष्य अपनी रचना से जकड़ा हुआ है और फिर भी ब्रह्मांडीय अनंतता की ओर देखता है। वैसे पेंटिंग मुख्य रूप से गहरे रंगों और सफेद-लाल बिंदुओं पर केंद्रित है। यह दृश्य प्रभाव को सीमित कर सकता है और लंबे समय तक देखने पर इसे एकरस बना सकता है।
वाज़दा ख़ान की यह ‘ड्रीम डायरी’ न केवल देखने वाले की आँखों को आकर्षित करती है, बल्कि एक संवाद भी करती है। ‘ड्रीम डायरी’ का शीर्षक ही दर्शकों को स्वप्न और वास्तविकता के बीच के संबंध पर विचार करने के लिए प्रेरित करता है। यह पेंटिंग हमें हमारे भीतर की गहराइयों में झांकने और उन प्रश्नों का सामना करने के लिए प्रेरित करती है, जिनका उत्तर सरल नहीं है। पेंटिंग की लाल सीढ़ी उस जिज्ञासा का प्रतीक है, जो मानव अस्तित्व की खोज में निहित है। यह हमें अपने स्वप्नों और वास्तविकताओं को टटोलने के लिए आमंत्रित करती है। पेंटिंग में मशीन-जैसी संरचनाएँ और ब्रह्मांडीय पृष्ठभूमि के बीच का विरोधाभास मानव और प्रकृति के बीच के संघर्ष को दर्शाता है।
माइकल एंजेलो ने अपनी प्रसिद्ध मूर्ति “डेविड” न केवल एक ऐतिहासिक किरदार का चित्रण थी, बल्कि यह उसकी भीतरी संघर्ष, आत्मविश्वास और साहस को दर्शाने वाला एक व्यक्तिगत संवाद था। जब दर्शक इस मूर्ति के पास खड़े होते हैं, तो वे न सिर्फ उसकी शारीरिकता को देखते हैं, बल्कि उस मानसिक और भावनात्मक संघर्ष को भी महसूस करते हैं, जिसे डेविड के चेहरे और शरीर की स्थिति के माध्यम से व्यक्त किया गया है। यह व्यक्तिगत संवाद कला में दर्शक के जुड़ाव को गहरा करता है और कला को केवल दृश्यात्मक रूप में नहीं, बल्कि एक आंतरिक अनुभव में बदल देता है। वाज़दा ख़ान की ‘ड्रीम डायरी’ भी एक ऐसी कला-कृति है, जो दर्शकों को एक ऐसी यात्रा पर ले जाती है, जहाँ वे अपने भीतर की गहराइयों को देख सकते हैं और ब्रह्मांडीय अनंतता का अनुभव कर सकते हैं।
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नोट – कवयित्री और चित्रकार वाजदा ख़ान की चित्रों की प्रदर्शनी ‘AT A MEMORY SQUARE’ दिल्ली के त्रिवेणी सभागार में हुई।
